Dreams

Tuesday, April 17, 2012

मौका परस्त! Copyright©


हर मोड़ पे है मौका
हर राह में है मौका
हर जीत , हर हार में है मौका
और मैं मौका परस्त हूँ





हार में है जीत का मौका
जीत में है त्याग का मौका
त्याग में है मोक्ष का मौका
और मैं मौका परस्त हूँ

अतीत में है अनुभव से सीखने का मौका
वर्तमान में है सपने देखने का मौका
भविष्य में सपने साकार करने का मौका
और मैं मौका परस्त हूँ

कौन कहता है मौका परस्ती एक दोष है
जिन्हें मौके मिलते हैं वह उन्हें बहा देते हैं
जीने नहीं मिलते वह भाग्य को ललकार देते हैं
पर मौका परस्ती में जो स्वाद है
वह शतरंज की छाओं में भी नहीं
जीत की मशालों में भी नहीं

मौका न मिले तुझे तो छीन ले मौका
जो तेरे मौके छुपा के रखते हैं
उन्हें तू त्याग दे,
अपने मौकों को खुद आकर दे
मौका परस्त न होगा तो
जीवन बिना ध्वज लहराए मुरझा जाएगा
तेरे नाम का दीप जले बिना ही इतिहास चला जाएगा

Monday, April 2, 2012

क्षमा दान की सुगंध ! Copyright©


भक्ति मार्ग में चलने को हूँ मैं अब अग्रसर
पग बढाने को आतुर हूँ, झुका हुआ है मेरा सर
अंतिम पग क्या होगा, यह तो वह ही जानेगा
प्रथम पग क्या होगा, मेरा ह्रदय कैसे मानेगा






भक्ति मार्ग का पहला पग होगा माया का त्याग
मोह से मुक्ती होगी , इन्द्रियों के जाल से निकाल होगा ,त्रुटियों का परित्याग
दान से आसान त्याग की परिभाषा मुझे नहीं अभी ज्ञात
पहले नेहलाऊंगा मन को भक्ति में, ठंडी करूँगा थोड़ी अन्दर की आग


दान करूँ तो क्या करूँ , पहले किसको दान करूँ
किसकी भक्ति में सर झुकाऊं, किसका पहले ध्यान करूँ
यह प्रश्न था मन में मेरे, और उत्तर मिला नहीं
एक बगीचे में बैठ गया मैं, सोचा प्रकृति से आरम्भ करूँ


क्यारियों में फूल थे और, हरियाली थी चरों ओर
तितलियाँ मदमस्त उडती उडती, शांत करती सारा शोर
मन में मेरे टीस उठी, कि कैसे समझूंगा दान का अर्थ
कैसे अहम् की मृत्यु होगी, कैसे होगी आत्मा की भोर


फिर चला मैं आगे तो बिन चाहे एक फूल को रौंध दिया
शूल उठा मन में मेरे तो उसका हाथों में गोंद लिए
पुछा मैंने उस से, कि कैसे मैं दान करूँ
बोला वह कि बैठ भक्त, तुझमे मैं दान करने का भाव भरूँ


सूंघ अपने जूते की एढी, जिसने मुझको रौंदा था
जहाँ मेरा स्थान था , जहाँ मेरा घरौंदा था
मेरी मसले जानी की सुगंध अभी भी ढी में है तेरी
यह ही क्षमा दान का पहला सबक, यह ही है तेरी सीढ़ी


जिसने तुझको रौंद दिया हो, तेरा जीवन उधेड़ दिया
तू उसे क्षमा अपना प्रदान कर
वह तुझे चाहे मार गिराए
तू उसे गले लगाके, क्षमा दान कर


क्षमा दान ही ब्रह्म दान है
क्षमा से ही खुलते द्वार , जो अब तक थे बंद
उसमे ही सार छुपा है
उसमे ही ईश की सुगंध


सुगन्धित कर जीवन उन सबका जिसने तुझपे घात किया
जिसने तुझे ठेस पहुंचायी, जिसने प्रतिघात किया
ईश क्षमा में बसा हुआ है, उसी की सुगंध है
उसकी भक्ति करनी है तो , मन तेरा क्षमा को प्रतिबद्ध है

Thursday, March 8, 2012

बहनजी , ज़रा सूंड बचा के! Copyright©















अरे पूंछ दबा के हाथी भागे
माया के अब टूटे धागे
कुर्सी कुर्सी करती माया
साइकिल हो गयी तुझसे आगे
फव्वारे अब जा लगाले
मूरत पे लड्डू चढ़ाले
बॉल नही अब नाक कटा ले
अब हॅपी बड्डे मनाले
बहु-जन में अब बहु कहाँ हैं
बहनजी ही बस अब जवां है
डूबी नय्या तू बचा ले
कांसी की मूरत बनवाई
उसपे माला भी चढ़वाई
दल दल दलित का नारा लगाया
ग्वाले ले गये पर मलाई
गठबंधन अब कैसे होगा
बिना छुरी, बिना हथगोला
सारी सीटें चली गयी हैं
तेरी कुर्सी की अब बारी
कांसी जी तो बंसी बजा के
खर्च हो गये बीन बजा के
मूरत उनकी तूने लगवाई
साथ अपनी भी बनवाई
सपा मार गयी बाज़ी और
अब कैसे होगी भरपाई
अब चुनाव मे आना बहना
हाथी को पहना के गहना
मिनिस्टर होंगे अब अखिल भैया
पापा मुलायम के अब नखरे सहना!

Tuesday, March 6, 2012

चौंसठ घर ! Copyright©


चौंसठ खानों में देखो तो
कैसे बिसात बिछी है
हर एक मोहरे की अपनी किस्मत
कैसी रेखा खिंची है


पैदल सीधा चलता
सीधा ही चल पायेगा
कभी दुश्मन रोकेगा तो
कभी न्योछावर हो जाएगा




बलशाली हाथी भी सीधा ही
चल पाता है पर कितना
जतन कर ले कोई
दुश्मन मार गिराता है
सीधा सीधा चल चल के
कई खाने पार किये
कभी बलि चढ़ाया गया
कभी दुश्मन के
खाने सारे चार किये


मदमस्त ऊँट की चाल यहाँ पे
टेढ़ी टेढ़ी चलती है
तीरंदाज़ सा लगता कभी
कभी काया ढाल जैसी लगती है
टेढ़ा टेढ़ा चल चल ऊँट
कई जंगों में कुर्बान हुआ
परचम लहरा पाया कभी
कभी यूँ ही बेहाल हुआ


घोडा ढाई घर चलता है
और ढाई से मात दे पाता है
फुदक फुदक के घोडा
शत्रु के सर पे चढ़ जाता है
भागे इधर उधर
मचाये उछल कूद
कभी शांति का झंडा पकडे
कभी जेब में होता बारूद


अब वजीर शक्ति शाली
किसी भी ओर बढ़ पाए
किसी को भी रौंद दे
किसी पे भी चढ़ जाए
वजीर-इ-आज़म के अंदाज़
निराले , चाल निराली भई वाह
जिस ओर बढ़ा लो बढ़ जाए
बिना किये किसी की परवाह


यह सारे मोहरे हैं बिसात में
केवल एक कारन वश
विलासी बादशाह को बचा लें
और खा जाएं दुश्मन का सर
पर सोचो ऐसा बादशाह में होगा क्या
जो सब मर मिटने को हैं तैयार
चाहे गिर जाएँ खुद लेकिन
लगायें बादशाह की नय्या पार


मेरी मानो बनो बादशाह
पहनो जीवन में शाही ताज
सिपाही तो गिरने के लिए ही पैदा होते
तुम बदलो अपना आज
शहंशाह के जैसे जीवन जीलो आज
नतमस्तक हो दुनिया
पहनाये तुझे हरदम ताज
इसमें ही सार छुपा है ,
इसीलिए शाही जीवन मैंने पाना है
नहीं तो खेल ख़त्म हो जाए जब
सब मोहरों को एक डब्बे में ही जाना है
सब मोहरों को एक डब्बे में ही जाना है
सब मोहरों को एक डब्बे में ही जाना है!

Monday, March 5, 2012

नया करो रे, नया करो...! Copyr​ight©


कुछ नया तो करो
कल को आज पे मत धरो
कल को आज से मत मढो
अरे कुछ नया तो करो


कुछ नया करने के पैसे नहीं लगते
खर्चा केवल कल्पना का है
उसे खर्चने में भला क्या रोक
उसके प्रयोग से ही बस तुम डरते



नया करो निर्माण, पुराना सब बेकार
बन जाओ आज के तुम रचनाकार
रंगों से भरो नयी कूची
और दे दो एक नए आज को आकार

नया करो रे, नया करो
थोडा खुद पे बोझ धरो
पोथी पढ़ पढ़ कुछ न हो
अब आखर तुम नया गढ़ो


कल रोये थे तो आज हसो
कल बिखरे थे तो आज बसों
रुके थे तो आज चलो
नया करो रे , नया करो


मौलिकता हो लाठी तेरी
गगन में हो टिकी आखें
कल के पीछे न आज लड़ो
नया करो रे नया करो


क्यूँ है सबके नाम अंकित
इतिहास के पन्नो में?
जागीरें किसी के हाथो
किसी का जीवन घुटनो में?
जो विपरीत बहा है वह ही तो
अनुपम है
जिसने रिवाजों को तोडा वह ही तो
प्रथम है
चाहे गिर जाओ , पर चला करो
नया करो रे , नया करो


जो सच्चे मन से इच्छा हो
कुछ नया करने की
ब्रह्मा सामने मिटटी रख देंगे
जो दुस्साहस करने की बात करो तो
कृष्ण सारथी बन लेंगे
बूढी सोच को पहले जवान करो
नया करो रे , नया करो
नया करो रे, नया करो
नया करो रे , नया करो