Dreams

Thursday, July 20, 2017

रास (C) Copyright



हर बार जब भी मन की घर्षण 
को सुनने का प्रयास किया है मैने
जिव्हा को अपनी पहले सूरदास किया है मैने
जब कान मेरे स्वयं के सुर को सुन ना पाते
तब कहीं अपने मन के साथ
रास किया है मैने
और फिर जाकर मन को अपने
अपना ही दास किया है मैने

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