Monday, December 14, 2009

दहाड़! Copyright ©


ऐसे दहाड़ कि थर्राए

ये धरती और यह गगन,

ऐसे, कि घबराये

दुश्मन का भी मन!

निर्भय होके जा

तू उस चोटी पे,

और छीन ले ये आसमा

और धरती उस ईश से

की ओस की तरह पाक

और उजली धूप की तरह नेक

सा हो तेरा विश्वास,

आंधी तूफ़ान से

कम्प्कपये तेरी यह जीतने की आस.

बोल जितना बोलने दे उन आवाज़ों को

तू अपने मौन से ही हिला दे उनका प्रयास।


तू है धरती पे पैदा हुआ चिंघाड़ने को,

अपनी गूँज से हर मंज़र को पाने को.

अकेला ही चल पर चला तू ज़माने को

मिटा दे तू हार के हर एक बहाने को।

पिघलने दे मोम को, शम्मा को तू जलने दे,

चल अकेला ही तूफानों में , सब को झुण्ड में तू चलने दे।

साहिल के सुकून पे होने दे खुश उन कमजोरों को,

तू जाके तूफानों से कश्ती निकाल।

इरादों कि चट्टान पे टूटने दे उन लहरों को,

तू अपने विश्वास कि नाव हरदम संभाल।

भीग जाने दे नसों को अपनी

उम्मीद कि आग में,

डूब जाने दे राघो गो

इरादों कि भाप में,

बढ़ा मंजिल कि और

अपने कदम लडखडाने दे,

है फासला जितना भी

तू आगे बढ़ा चल ज़माने में।

शिखर पेजाके के ही तू अब दम भर

और चिल्ला दे अपने अन्दर का गुबार,

दिखा दे सबको कितनी ऊंची है तेरी उड़ान

और कितनी भारी है तेरी दहाड़।

ऐसे दहाड़ कि मिमिया पड़े

जंगल का राजकुमार

ऐसे दहाड़, कि आंधी भी अपना

रुख मोड़ ले और

ऐसे कि सब पर भरी पड़े तेरा प्रहार।

ऐसे दहाड़

ऐसे दहाड़, ऐसे दहाड़!

Tuesday, November 17, 2009

One-day Mataram! Copyright ©

One-day Mataram!

26th or the 15th,
Does it matter?
Just dates of the calender.
Saffron Green and White
Does it matter?
just colors that glitter.
National parades or ministerial clatter
Does it matter?
just shows of the latter.
population explosion or economic shatter
Does it matter?
just everyday banter
Nothing matters to us more than a day
our memory is so short,that's our forte`
and on that day, let us sing in tandem
ONE-DAY Mataram! ONE-DAY Mataram!

National anthem,patriotism and motherland,
terrorism,corruption and pollution on the other hand.
Gandhi,Subhash and Pandit Nehru,
Slain Unnikrishnan and Aman Kachru.
Swadeshi, khadi and our own Marrutti
against, Reebok, Nike , Coke and Pepsi
Gucci is good,jhola is bad,
Malls are the best thing we ever had.
Marlon Brando a legend, Amitabh an "outsider"
Team India are losers and Australia- a fighter.
"Foran" is cool, desi is cheap,
Bollywood is sham, Hollywood is deep.
Ma-Pitaji is out of fashion,
In vogue is MOM and DAD.
"Mom, not with the salwar-kameez"
I want one who is Jeans clad!
Virginity is no longer a virtue,
but a lack of opportunity.
hey dude we belong to the "uncle's" fraternity.
Diwali is not what we choose,
but Thanksgiving, turkey and angrezi booze.
'Thanks for calling your own BPO's,
we will be happy to listen to all the FO's
Just give us lotsa "daalars",
we will be on our toes.
We are just one more babe in your Harem
for us its always
ONE-DAY Mataram ! ONE-DAY Mataram!

Yo Bro! Yo sis, If that's how you'll listen
Do something to this place
check to see what tis' missin'
Bill Buffet nor Warren Gates
Aint'gonna decide our F**ing fates.
Sl(a)m the Dog, and win the race
Make the world run at your pace.
Don't go there but bring em here,
Not New York but Nehru Place.
Take the oath everywhere,
say the Mataram in your prayer.
Let her shine like the golden bird again,
More than the dollar or the euro or the yen.
Take pride in what you are,
show the world you're not far.
Let the ONE-DAY be on the field,
and the Mataram never yield.
Even if your daily thoughts
are organized or chaotic or random
let them always be

Saturday, August 8, 2009

DO LIONS FEAR? Copyright ©

Do lions fear? Owning the jungle, walking tall, do they actually fear something? Not be known,losing their pride,dying ? Because when they feel hungry, they hunt and no one hunts better than them. When their territory is threatened they still hunt to prove that their era is not yet over.

The pain is excruciating, the fear is numbing, the wings want the spread, but they are tied.Wanting to break free, but cant. Knowing he is born to win but not knowing how to do it,terrifies him, sends shivers down his spine. The constancy of the heartbeat sounding like cymbals in his ear makes him loose his poise, his concentration. The sleepless nights, the sweaty mornings, the cold palms, add to the internal pandemonium. His serene demeanor hides the whirlpool of thoughts.

The soothing rain cannot quench his thirst, the warm sun does no good to the dampened inside.The fears cloud his vision,his roar is no more than a squeak. He walks through the night under the moon each night, his mane swaying in the wind. He climbs a hill,loses his breath, runs some more till he reaches the summit. He looks at the moon and roars. It makes them shiver like the winter chill, but he is not sure.

A slight sound makes him twitch, he cannot believe it.He growls, may be in fear. His eyes shrink, he smells nothing. It creeps into him. he can sense it.. What is it, he is the king, what does he fear? But he does. He paces again,this time not as frantic as the last. He wants to know. Picks up speed, runs miles before he stops.He feels it coming. Runs again.He feels like the hunted.

Cold sweat runs along his sides,the night wind cannot dry it, because he thinks it has conspired against him too. He is now far from his pride and his lair, into the open. He must get courage,he reminds himself he is the king.He runs more,even further,even faster. Now more confidant. its almost dawn, the slight redness of the sky falls directly into his eyes. he runs towards it. The chill is slowly depleting, the fear is fading.

The sun has come up and so has he, only to find bright green lands with his prey right in front of him.So many of them, he takes guard, he bends down, smells the prey and slowly moves towards it. Not a rustle, not a sound, even his breath is controlled.He locks his eyes on one and leaps.The prey is no match to his skills and power. He digs his claws into it. And his fangs take the neck. One blow is enough. This reinstates his confidence.His razor sharp teeth dig deep. The King won yet again.

He rests, feels triumphant.One paw on the carcass and his eyes looking directly into the sun. He roars.

Yes, he fears every night, but bounces back at dawn, Only kings can do that. Only he can!

But, He Fears!

Tuesday, April 21, 2009

SUMMER OF 09 Copyright ©

"उफ़्फ़् ये गर्मी, हाय् रे गर्मी
उफ़्फ़् रे ट्रैफ़िक्, बाप् रे ट्रैफ़िक्
उफ़्फ़् रे धुआ, उफ़्फ़् रे दुनिया
डेन्गू, मलेरिआ ,और् चिकन्गुनिय
हाय् नीम्बु पानि, हाय् गन्ने क रस्
शिकन्जी,अम्बियान् और् त्हन्डी सिवैयान्
AC लाओ, cooler लगवाओ, fridge भी मन्ग्वाओ.
नही तो मै मैके चली !
तुम् रमाते रहो दुनि!

तो साहब्, ये थी फ़र्मयिश्,
इस साल की बेवक़्त गर्मी के साथ, धम्की
और हमारी आज़्मायिश!
हमने भी कमर कस ली,
अपना मुद्दा रखने कि ठःन् ली.

हमने कहा भाग्यवान
इतना ना हो परेशान
सब लेकर आता हु,
तुम्हारे आराम के लिये सब जुगाड लगाता हु
कहो तो कारखाना ही मन्गवा दू
या मौसम विभाग से गरमी ही बन्द करवा दू?
आजकल तो उनके पास सब चीज़ का switch है
मन मर्ज़ी बारिश करवाते है,
लोगो को बाढः मे डुबाते है
और फ़िर नेता, अभिनेता और news channel
सब मिलके कमाते है.
बेवक़्त् गरमी भी येह ही करवाते है
विदेशी थन्डाई का सामन आयट करने के चक्कर् मे
हमारी अर्थ व्यवस्था को ये ही आग लगाते है.

बस भी करो जी , तुम तो हर बात पे इस या उस विभाग को टोकते हो
मौसम भी कोइ चीज़ है जो कोइ बेच पाये.

अरे मैने कहा बेगम आजकल सब बिकाऊ है.
विदेश से मर्केटिन्ग सीख के आते है
और् विग्यपनो से हम तुमको एहसास दिलाते है
कि हुम कितने पिच्डे और वो कितने आगे है
और हम भी...
अल्लाह्, हनुमान और गण्पती पे,
Obama की जीत् का प्रसाद चढाते है I

चलो मै यू गया और यू आया
अब हम पहुचे भाइ बाज़ार
तपती धूप मे अपनी सईकल पे सवार
hirlpool hirlpool!
yes sir what can I do for you?
मैने कहा श्रीमान्, क्यु मज़ाक करते हो
विग्यापन तो इतने निकालते हो और दुकान पे आये ग्राहक
को बेवक़ूफ़ बनाते हो?
पहले तो यार अपने fridge से एक थन्डा गिलास पानी का पिलावओ
उसके बाद, उस ही fridge के featuresबतलओ,
फ़िर damage कितना होगा वो समझाओ.
आरे भाई ऱामू, " पानी " तो लाना
अभी लाया सर्,
मैने सोचा वाह् भई क्या सर्विस है,
विदेशी कम्पनी की T-shirt पहनके लोग तो भाई
तह्ज़ीब भी सीख गये...
10 मिनट बाद, रामू के गन्दे हाथो मे जकडा हुआ
एक चाये के cutmके जितने गिलास मे पानी आया,
प्यास से न मर जाये, हुम्ने जल्दस्जल्द् गटकाया,
चलो सिर् अब आपको no frost ,defrost और one minute ice दिखाता हु,
इसे कैसे operate करते है वो बतलाता हु.

sir,sir करके उसने सारे switch घुमये,
विदेश मे हुए research के सारे रन्ग दिखाये
हमने पूछा......" damage"?
sir only 1 with 4 zeroes ..
अरे कमाल करते हो... 1 लख मे तो आजकल "वो" गाडी दे रहा है
ऐस इसमे क्या है..
Sir foriegn से बन के आती है...
वाह् हम ही को...
चेन्नई मे बनाते हो, software बन्गलूरू मे
पुणे मे assemble करते हो और गुढ्गावा से marketing,
इटना बडा scam चलाते हो और foriegn foriegn चिल्लाते हो.
bargaining करना तो कोइ हम भरतीयो से सीखे..
हम भी अड् गये .
चलो एक् AC भी चाहिये... कितने मे बान्धोगे
cash दून्गा
वो भी नही हिच्किचाया..
सीधे 15 even का बिल बनाया
टेम्पो मे भी चढ्वाया ,
3 साल की warranty भी दिलवाया.
हम भाई खुश...
देवी को आज प्रसाद चढायेगे
और पूरी गरमी सेवा करवयेगे.
घर आते आते शाम भयी
सोचा आज तो lottery लग गयी

घर पहुचे खटखटाया
हम तो उन्हे गुस्से मे छोड् गये थे
वो तो भीगी बिल्ली की तरह हो गयी
न नज़रे मिलाइ न बात
शर्म से पानी
क्या हुअ बेगम्
मै तो ले आया, तुमहारा fridge और AC
अब तो मुस्कुराओ
और जलदी से भोग लगओ
टीका ज़रा आरम से लगाना
और आज से ठन्डाई के लुत्फ़् उठाना

मुझे क्षमा करे स्वामी
भारी भूल हो गयी
आपको तपती धूप मे भेजके
मै तो ग्लानी मे डूब गयी
क्या हुआ
अब हमारी भी सुन लो जी
AC , fridge सब मन्ग्वाया
तुम्हे नीचा दिखाया
पर ये नही याद दिलाया
कि बिज्ली नही आएगी
मुश्किल से 2 घन्टे अपनी शक्ल् दिखाएगी
उस विभाग मे तो सबसे ज़्यादा है corruption की आग
बिल भरो य ना भरो बिज्ली उतनी ही आयेगी
खेतो की सीन्चाई कि आड् मे पूरी गर्मि सढायेगी
हम तो मटके का ही पानी पी लेगे
वो कम से कम बाबू की तरह अकढ तो नही दिखाता
सरकरी दफ़्तर के जैसे घूस तो नही खाता
chilled ना सही, पर धोखा तो नही दे जाता
AC के बदले खस की टट्टिया लगवयेगे
वो बेचारी दरवाज़े पे टन्ग् जाति है
सरकरी वकीलो, डलालो कि तरह् एह्सान् तो नही जतती है

मै मन ही मन मुस्कुराया
फ़िर साजो-सामन वापिस करके आया
दो घडे, 3 खस की टट्टिया भी ले आया
और उनसे रात भर पखा करवाया

अब तो बस
बरसात का इन्त्ज़ार है
मौसम, बिजली और हर सरकारी विभाग से ये गुहार है
कि सब अपना है
इसे बेह्तर बनाओ
और हर गरमी, बरसात और जाढो को
सबके लिये आरामदेह् बनाओ.
घूस न खाओ,सिफ़रिश न लगाओ
बस इस देश को इस corruption के
cancer से मुक्त् करवाओ!

इस देश को इस corruption के
cancer से मुक्त् करवाओ!