Dreams

Wednesday, August 9, 2017

मन में कोहरा, कोहराम हृदय में (c) Copyright



मन में कोहरा
कोहराम हृदय में
ना ही मन में राम बसा है
ना ही मेरे श्याम हृदय में
किंतु फिर भी पुलकित है मन
मानो
है कोई धाम हृदय में
यह शीश जो कभी झुका नहीं
नतमस्तक है,
जैसे हो कोई प्रणाम हृदय में
बस नृत्य है
दौड़ते लहु में
ना है कोई विराम हृदय में
पर साँसों की इस उथल पुथल में
स्थिर सा है कोई ग्राम हृदय में
नित्य शौर्य का उदगम मन में
नित्य भय की शाम हृदय में
एकाग्र है मन, शांत चित्त भी
फिर भी ना कोई विश्राम हृदय में
मन है बगुला, चुप चाप खड़ा है
पर है कोई संग्राम हृदय में
यह प्रेम नही तो क्या है राही
उसका ही है यह काम हृदय में
मन में जो यह कोहरा है और
जो है ये कोहराम हृदय में
मन में जो यह कोहरा है और
जो है ये कोहराम हृदय में

3 comments:

रश्मि प्रभा... said...

http://lamhesejudalamha.blogspot.in/2017/08/blog-post.html

Roop Kala said...

जो है ये कोहराम ह्दय में ....! बहूत खूब ।

pappi lalli said...

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