Dreams

Sunday, June 24, 2012

ऐंठ गया .. कि बैठ गया? Copyright©



जब काले मेघ छाए
और आकाश की छाती फटी
बिजली ने मचाया शोर
केवल अंधेरा ही था चारों ओर
तम के साए से था जीवन सराबोर
जकड़ा था मन को जब डर घनघोर
पथिक बता तूने क्या किया
ऐंठ गया कि बैठ गया?

जब सारे पुल चूर हुए
जब सपने तुझसे दूर हुए
जब नावें सारी डूब गयी
जब किस्मत तुझसे ऊब गयी
जब धारा तेरे विपरीत बही
जब अकेला था तू साथ नही
पथिक बता तूने क्या किया
ऐंठ गया कि बैठ गया

जो बैठ गया तू तो
सिंघासन कैसे पाएगा
कैसे तू जले बिना
जग को चमका पाएगा
ऐंठ किस्मत के आगे
ललकारेगा जब परिस्थितियों को
ऐंठ जब विपदा के आगे
तोड़ेगा जब मापदंडों को
तब उतरेगा ईश और बोलेगा तुझसे यह
मैने परखा है तुझको
और अब यह मैने जाना है
तू महापुरुषों की श्रेणी मे है
और महान तुझको माना है
तूने हार ना मानी
तूने छाती अपनी हरदम तानी
जब मैने काँटे रखे तो
समझा के तू अब बैठ गया
पर तूने कांटों से राह बनाई
तू किस्मत पे ऐंठ गया

तो पथिक ना घबरा और
ना सोच कि सब बैठ गया
जब चुनने का मौका आए
दिखला देना सबको कि तू
बैठा ना पर ऐंठ गया
तू बैठा ना पर ऐंठ गया
बैठा ना पर ऐंठ गया.

2 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 24/07/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

एक निवेदन
कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।
इससे आपके पाठकों को कमेन्ट देते समय असुविधा नहीं होगी।
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23lessnno