Dreams

Thursday, April 22, 2010

मीरा से मोना डार्लिंग !Copyright ©.


कान्हा के नाम की माला

हाथ में मीरा की, थी आँखें बंद

अटूट प्रेम के सूत्र में

पिरोये हुई फूलों की सुगंध

हरी हरी के सुर पिरोती

वीणा हाथ में लेके

मोहन का राग़ छेडती

सपने बुनती अनदेखे

निराकार से प्रेम था ऐसे

कमल के पत्ते पे सुबह की ओस के जैसे

प्रेम कब भक्ति बना

और कब भक्ति बनी थी प्रेम

ये न तुम जानो , न मैं

डोरी ऐसी जैसे लता हेम!


सदियाँ बदली प्रेम भी बदला

सर्वत्र न्योछावर करने वाली

प्रेमिकाओं का नाम भी बदला

निस्वार्थ भक्ति की जगह थी अब डाइमंड रिंग

और मीरा हो गयी हमारी,

मीरा से मोना डार्लिंग।

पहले प्रेम जताओ, चक्कर लगाओ

फिर लाओ अनगिनत गिफ्ट

बाइक में घुमाओ, शौपिंग करवाओ

फिर कहीं देंगे लिफ्ट।

नखरे पहले सहो तुम मेरे

प्रोटेक्शन दो हमे कि कोई और न हमे छेड़े

भाव तो फिर भी उनको दूँगी

पर तुम फिर भी दुम हिलाना

प्रेम तो तुमसे मैं करुँगी

पर ज्यादा पोजेसिव मत हो जाना।

अपनी माँ से तुलना न करना

मैं तो हूँ एक मॉडर्न गर्ल

तुमको सीधे बाल पसंद तो क्या

मुझे तो भई करना उनको कर्ल।

कैसे कपडे पेहेनते हो

कुछ तो सीखो राहुल से तुम आजकल का ट्रेंड

अब उसको कुछ मत कह देना तुम

ही इज जस्ट अ “नाइस” फ्रेंड।

क्या हमेशा हिंदी में तुम बात करते रहते हो

मॉडर्न बनो, इंग्लिश में बोलो ,

“ यू नो इट्स अ नाइस थिंग”

यह सब करने के बाद कहती

सॉरी हनी इट वॉज़ जस्ट अ कैजुअल फ्लिंग।

क्युंकी यू सी, इ ऍम नौट मीरा

आई ऍम मोना डार्लिंग!


साहूकार हो गयी प्रेमिका

प्रेम हो गया लुप्त ह्रदय से

आ गया घमंड

चाबुक पकडे खड़ी है मोना

मीरा हो चली “ओल्ड फैशंड”

“सेटल्ड” है प्रेमी , कमा रहा तो

गुड हो जाता है

वरना वो ही प्रेमी

“टेल मी वाई आई शुद” ही सुन पाता है

भक्तन थी वो तो ही मोहन

उसे दर्शन दे जाता है

अब वो ही मोहन इसीलिए

“नाइस मीटिंग यू, नाइस टॉकिंग टू यू”

गुड बाय , टाटा के सरपट नारे लगता है

बदल गयी मीरा देखो कैसे

कहने लगी

वाई शुद आई बौदर, आई डांट केयर

आई डिड नौट डू अय्नीथिंग

तुम्ही समझे मीरा मुझको

मैं तो हूँ मोना डार्लिंग

तुम्ही समझे मीरा मुझको

मैं तो हूँ मोना डार्लिंग

तुम्ही समझे मीरा मुझको

मैं तो हूँ मोना डार्लिंग!

Wednesday, April 21, 2010

मौन Copyright ©.


चिल्ला चोट मची हर ओर

विज्ञापन भी करते शोर

नेता चीखें, अभिनेता भी

भाषण का है बाजे ढोल।

इसके बीच खड़े वो लोग

जो बदल देते दुनिया को

बार बार लाठी खा के

चुप रहते सहके अपने घावों को

शक्ति इनमे कहाँ से आती

इतनी कि यह सब सह जाएं, यह हैं कौन

यह वो हैं जो चुप्पी साधे, सोना उगलें

यह वो, जो रहते मौन!


देखो कैसे मौन होकर है कमल खिला

मूक होके भी फैलाता सद्भावना सदा

मौन बैठे हिमालय को देखो ज़रा

ताने सीना ऐसे कि दुश्मन

को हर बार होना पड़ा भाग खड़ा

थामे अन्दर तूफ़ान शंकर की भांति

मौन है प्रशांत भी

और उसी मौन का धारक है

ये अथाह आसमान भी।

क्यूकी बांध जो टूटे कभी

तो हिमालय ऐसी दहाड़ लगता है

कि मौन हो जाता जो इसे ललकार दिखाता है

वरुण देव जब तोड़ें अपना मौन

तो वो प्रशांत भी जल प्रलय फ़ैलाता है

मूह खोल देता आकाश भी

और बरसाता गोले अकस्मात् ही।

कुछ कारणवश ही इन सबने धरा मौन व्रत है

शक्ति का संतुलन बना रहे इसीलिए यह प्राण है

मौन में जो अपार शक्ति है उससे हम भी कुछ सीखें

हिला दें उनका प्रयास जब भी दुश्मन चीखे।

एक धोती और चुप्पी साढ़े महात्मा के

मौन ने ही अंग्रेजों को भाग खड़ा किया

और पच्चीस साल के उसके मौन ने अफ्रीका में

काले गोरे के भेद भाव बेचने वालों को डरा दिया।

प्रभोधन का एक मार्ग है ये मौन

बुद्ध हो गए सिद्धार्थ से अच्छा यह जाने कौन

योग साधना से बढ़कर कभी कभी होता यह सन्नाटा

अद्वैत वेदांत कहे

आत्मा नियंत्रण का नहीं ज्ञान यदि तुझे मौन करना जो नहीं आता।

बोल देने से हरदम विश्व में बदलाव लाया कौन?

परिवर्तन तो वो लाये कर्म कर गए पर रहे मौन।


मौन स्वर्ण है

मौन श्वेत है

अद्भुद संगीत है मौन।

मौन बुद्ध है

मौन ही ब्रह्मा

शिव का डमरू है मौन।

मौन साधना

मौन योग भी

और मोक्ष भी है मौन।

मौन है शक्ति

मौन है भक्ति

और आराध्य भी है मौन।

मौन ही तरकस

मौन धनुष

और ब्रह्मास्त्र भी है मौन।

जो राह दिखाए

दृढ़ता दिलाये

ऐसा अमृत है और कौन

मौन

मौन

बस मौन!

Tuesday, April 20, 2010

धर्म या पाखण्ड Copyright ©.


धर्म क्या है

मंदिर के दर्शन

या आराध्य पे जल चढ़ाना

या प्रातः कल में अल्लाह को

पुकार लगाना?

रुद्राख्श की माला पकड़ के

१०८ बार शिव- शिव चिल्लाना

या फिर हर नए काम से पहले

उसको मिठाई कि रिश्वाद खिलाना?

मुझे नहीं था पता कि यह है धर्म

अब तो आ रही है मुझे शर्म

मैं तो यह सब नहीं कर पाता

और ना ही है कोई इरादा

रह गया मैं दंग

चिल्ला रहा हूँ मैं सबको कि

यह धर्म नहीं

यह है पाखण्ड,

घोर पाखण्ड!


भगवे कपडे पेहेनके

साधू करते पाप

उसपे टीका, बस्म रमा के

दिखाते सबको जाप।

गीता, कुरान से शब्द उठाते

और अपनी व्यग्तिकत ज़रूरतों के लिए

कुछ की कुछ परिभाषा बनाते

फिर राम मंदिर और बाबरी मस्जिद गिराते

जेहाद जेहाद और हर हर महादेव चिल्लाते

औरतों को विधवा और मासूम बच्चों को अनाथ बनाते

फिर मक्का की ओर मूह करके

और तुलसी की परिक्रमा करके

अपने कुकर्म पे अध्यात्म की परत चढाते

क्या यह है धर्म और अपना भारत अखंड?

पाखण्ड है पाखण्ड

घोर पाखण्ड!


अब तो सीधा कटु सत्य बोलूं तुमसे

करदो यह हथकंडे बंद

धर्म निरपेक्षता का झंडा पकड़ो

और करो भारत को बुलंद

नहीं तो मैं वो आवाज़ हूँ

जो है इतनी प्रचंड

जन सामान्य में जो पीड़ा है

उसको मैं कुरेद के उसे जगाऊंगा

जो घाव दियें है तुमने मैं

उन्हें पुनः हरा बनाऊंगा

और भगवे को तुम्हारे तन से कर दूंगा हरण

वो हिम्मत कर लेंगे जो कमज़ोर आते थे तुम्हारी शरण

फिर अन्दोल की लहर दौड़ेगी और

तुम्हारी व्यवस्था होगी खंड खंड

क्यूकि यह तुम्हे और हमको भी पता है

यह धर्म नहीं

यह है पाखण्ड

घोर पाखण्ड.

पाखण्ड!